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टीपीट ग्रीक मॅरेथॉन पूरी करते हैं

ये लेख सैमी टीपीट की भारत यात्रा का विवरण देता है, उन्होंने हालही मे ग्रीक मॅरेथॉन पूरी की और उसके बारे मे प्रेरणादायी रीपोर्ट बताई गई है

सैमी (लगभग फीडीपीडिस) टीपीट की ओर से अभिवादन

फीडीपीडिस भाग समझने के लिए पूरा लेख पढे और जाने कि रेस के अंत मे क्या हुआ.

यदि आप बीच का नाम फीडीपीडिस नही समझ पाते हैं, ये वो दौडनेवाले थे जिन्होंने एथेन मे संदेश पहुंचाया कि मॅरेथॉन की समतल भूमि पर एथेन वासियोंने परशियन लोगों को हराया है. वो लंबी दूर तक दौडते गया (जो लगभग २६ मील की दूरी है) और विजय की घोषणा करने के बाद मर गया. जब १८९६ मे असली ऑलंपिक ऑरगनायज़िंग कमीटी ने लंबी दूरी की रेस आयोजित करने का निर्णय लिया, उन्होंने फीडीपीडिस के दौड का क्षेत्र चुना. आगे जाकर निश्चय ही इस रेस को मॅरेथॉन कहा गया, क्योंकि विजय मॅरेथॉन की समतल भूमि पर ही मिली थी.

अब इसका हमारे साथ क्या संबंध? आप मे से बहुत से लोग ये जानते हैं कि जब मुझे कॅनसर है ये पता चला तब प्रभु ने मेरे दिल मे डाला कि मै ये मॅरेथॉन की असली जगह पर ओरिजन ग्रीक मॅरेथॉन मे दौडूं. मेरे सबसे उत्तम मित्र कॅन लीबर्ग और मैने ३० साल पहले ओरिजनल ग्रीक मॅरेथॉन दौडने का सपना देखा था. ऑटोमोबाइल ऍक्सीडेन्ट मे कॅन की मौत हुई और वो सपना कभी पूरा नही हुआ. फिर मुझे कॅनसर है ये पता चलने के बाद वो सपना मेरे अंदर फिर से जागा.

कॅन की सबसे बडी बेटी, क्रिस्टा लीबर्ग मिलटन ने महसुस किया कि वो अपने पिताजी की एवज मे मेरे साथ दौडे. क्रिस्टा अपने बीब पर उनका नाम लिखवाकर आई, और अपने साथ वो अपने पिताजी की तस्वीर एक फोटो फ्रेम मे लगाकर आई. के एक ट्रॅक पर वॉर्म-अप कर रहे थे, और मैने भी जाकर उनके साथ वॉर्म-अप किया. काश मेरे पास कोई कॅमेरा होता ताकि आप मुझ पर विश्वास कर पाते.

रेस सुबह ठीक ९ बजे शुरु हुई और मैने अच्छी शुरवात की, स्टेडियम तक पहुंचने तक मैने क्रिस्टा को कही नही देखा - यही पर कहानी बहुत दिलचस्प होती है. मै पहले ५ किलोमिटर ८:४२ पेस की रफ्तार से दौडा, जो कि मेरे लिए बहुत अदभुत बात थी. मुझे थकान महसुस नही हुई, मुझे अच्छा महसुस हुआ. उस पेस को पूरा करने के लिए मुझे ४ घंटे से कम नही लगने थे, मै यही करना चाहता था, १० किलोमिटर तक मैने यही पेस रखा, मुझे मज़बुत महसुस हुआ, १० से २० किलोमिटर के बीच बहुतसी पहाडीयां थी, लेकिन मेरा समय बिलकुल वैसा ही बना रहा. मै ८:५० पेस पर चला गया, लेकिन फिर भी मै ४ घंटे मे मॅरेथॉन दौडने के समय मे था.

greek1२० से ३० किलोमिटर के बीच केवल पहाडीयां थी - बडी पहाडी, लंबी पहाडी, भयानक पहाडी. मै जानता था कि मै अपने शॅड्युल से बहुत आगे हूं और मै अपना पेस ३२ किलोमिटर तक कम कर सकता हूं, और फिर भी मै इसे ४ घंटे मे ही पूरा कर पाऊंगा. अंतिम १० किलोमीटर एक तो उतार मे थे या समतल थे. वो मेरी योजना थी, खैर जैसे ही मैने पहाडीयां खत्म की मै थक गया, मेरे अंदर कुछ भी बाकी नही रहा. मेरा लक्ष्य था कि मै रीफ्रेशमेन्ट सेंटर तक पहुंचू जो कि २.५ किलोमिटर पर था. जैसे तैसे मै वहां पहुंचा और कुछ ड्रिंक्स लेने के बाद मै कुछ दूरी तक चलते गया. जब मैने दौडने की कोशिश कि तो मेरे शरीर के हर अंग मे दर्द होने लगा. पहले मेरा लक्ष्य था कि अगले २.५ किलोमिटर के रिफ्रेशमेन्ट सेंटर तक मै जॉग करते हुए जाऊं, और रीहायडरेट होकर कुछ समय तक चलता जाऊं. कुछ भी हो ये मुश्किल था. हर कदम पर दर्द बढता जा रहा था. मैने निर्णय लिया कि अगले किलोमिटर के निशान तक मै जॉग करते हुए जाऊंगा और फिर पैदल चलुंगा. मै वहां पहूंचा लेकिन मै नही सोचता था कि मै और आगे जा पाऊंगा. फिर मैने निर्णय लिया कि मै अगले रेड लाईन तक जाऊंगा, जैसे तैसे मै वहां पहुंचा लेकिन ये इतना खाली था कि मै मुश्किल से आगे जा पाया. मै कुछ समय चलता और फिर जॉग करता, कुछ समय के बाद मुझे लगा कि मै और नही चल सकता हुं, मुझे बहुत दर्द होने लगा.

लेकिन मै इसे परमेश्वर की महिमा के लिए कर रहा था और मेरे दोस्त केन लीबर्ग की याद मे कर रहा था. मै जानता था कि मै इसे अधुरा नही छोड सकता हूं. लेकिन ये बहुत मुश्किल था. अब एक किलोमिटर से भी कम अंतर था और मै रो रहा था क्योंकि शरिर का हर अंग दर्द कर रहा था. मै हिम्मत हारने के लिए तैयार था. लेकिन मै एक मोड पर मुडा और वो सडक सिधे स्टेडिम तक ले जा रही थी. उस दृष्य का वर्णन बयान से बाहर है. सैकडो और सैकडों लोग लाइन मे खडे थे और चिल्ला रहे थे, ब्रावो, ब्रावो, मै रोने लगा, मैने प्रभु की ओर देखा और मुझ मे बल आया. मै जॉग करने लगा. लोग चिल्ला रहे थे. फिर मै स्टेडियम तक पहुंचा, और वो दृष्य बहुत ही अदभुत था. ये पहला ऑलंपिक स्टेडियम ऐसे लोगो से भरा था जो ब्रावो, ब्रावो चिल्ला रहे थे.

मै अपनी ऊंगली स्वर्ग की ओर उठाकर दौडते हुए उस एतिहासिक स्टेडियम मे खडे चिल्लानेवाले उस भीड के पास गया, मुझे बहुत दर्द हो रहा था और गहरी भावनाओं के कारण मै रो रहा था. मैने फिनिश लाइन क्रॉस की और मै केवल यही कह सका, "मैने ये कर दिया है, मैने दौड पूरी की है." लेकिन जल्दी ही कुछ ध्यान भटकानेवाली बात हुई, जो भाई हमारी दौड के टुर के इंचार्ज थे उन्होंने कुछ गडबडी देखी और उन्होंने मेरे लिए कुछ पानी लाया.

जोनाथन मार्सिस, मसीह मे एक प्रिय ग्रीक भाई, और उनके दोस्त मेरी फिल्म बना रहे थे. वो विडियो कॅमेरा के साथ मेरी ओर दौडकर आएं और उन्होंने मुझे दौड के बारे मे कुछ कहने के लिए कहा. मैने कहा “मेरे जीवन मे मैने ये सबसे मुश्किल काम किया है.” जैसे मैने आशा की थी उतनी रफ्तार से मै नही दौड पाया. लेकिन मै दौड मे ऐसी समतल जगह पर आया जहां रफ्तार उतनी जरुरी नही थी. लेकिन रेस खत्म करना ही मायने रखता था.

greek2फिर मैने उपर देखकर कहा "मुझे लगता है कि मै बेहोश हो जाउंगा" आसमान घुमने लगा और सबकुछ घुंदला होने लगा. तुरंत ही पॉरामेडिक्स मेरे पास आएं और मेरे गिरने से पहले ही उन्होंने मुझे थाम लिया. मुझे अगले कुछ मिनट के बारे मे कुछ नही पता, बस यही पता है कि मुझे स्ट्रेचर पर रखकर मेडिकल टेन्ट मे लाया गया. बहुत डॉकटर मेरा परिक्षण करने लगे और मुझे टेस्ट करने लगे. वहां पडे पडे मै बेजान हो गया था.

डॉक्टर ने निर्णय लिया कि मुझे हॉस्पिटल मे ले जाया जाना चाहिए.मै कुछ घंटों के लिए मेडीकल टेन्ट मे था. क्रिस्टा ने एक घंटे बाद फिनिश लाईन पार की, और जस्टिन के बेटे जोनाथन मे दौडकर उसे जाकर बताया कि मै मेडिकल टेन्ट मे हूं. वो और वेड मुझे क्या हुआ ये जानने के लिए वहां आएं.

मुझे हॉस्पिटल ले जाया गया, एम्बुलंस के पॅरेमेडिन ने जोनाथन से मेरी दौड और मै कौन हूं ये पुछा. वो उसे मेरी कहानी बता पाया और उसे मसीह के बारे मे बता पाया. हॉस्पिटल मे आने के बाद मुझे बहुत से परिक्षण करने पडे, बल्ड टेस्ट, ई एक्स जी, एक्स रे और फिज़ीकल एक्ज़ाम जो कार्डियोलॉजिस्ट और इंटरनल मेडिसिनवाले लोगों ने किए. मैने वेटिंग रुम मे कुछ लोगों को देखा जो परेशान दिखाई दे रहे थे, लगता था कि वो मध्य-पुर्व से आए थे. राह देखते समय मैने उन से बातें करनी शुरु की. वो अफगानिस्थान के शरणार्थी थे और हालही मे एथेन मे आए थे. वो पूरी गडबडी मे थे. मैने उन्हें यीशु के बारे मे बताया और उनकी पहचान जोनाथन के साथ की. जिनकी सेवकाई शरणार्थियों के बीच थी.

मुझे से मुलाकात करने आनेवाले हर डॉक्टर ने मुझ से कहा," क्या ये आपकी पहली मॅरेथॉन थी?" मैने उन्हें सकारात्मक रुप मे प्रतिउत्तर देने के बाद उन्होंने मुझ से पुछा,"आपकी उम्र क्या है?" जब मैने उन्हें बताया कि मै ६१ साल का हूं तो तुरंत ही ग्रीक मे बोलने लगे.

सौभाग्यवश वहां एक और भाई थे, जिनके साथ आज बिलकुल ऐसे ही हुआ था. वो अपनी पहली मैरॅथॉन दॉड रहे थे और वो ६० साल के थे. उन के और मेरे बीच सबसे बडा फर्क यही था कि वो मर गएं.

अंत मे डॉक्टर ने मुझे हॉस्पिटल से छुट्टी दी और मै सुरक्षित रुप मे अपने हॉटेल रुम मे मेरी प्रिय पत्नी के साथ पहूंचा, मै अब फिर से सामान्य हो गया हूं और आपको हमारी चिन्ता करने की जरुरत नही है. हम ठीक हो जाएगे. कुछ भी हो हम अब "दो चोट खाएं" लोग हैं. आपने हमारे लिए जो प्रार्थना की उसकी हम सच मे सराहना करते हैं. हम कल एन्स्टरडॅम जा रहे हैं, जहां हम रात भर रहकर मंगलवार के दिन भारत मे दस दिन की सेवकाई करने जा रहे हैं.

कृपया प्रार्थना करे कि प्रभु अपनी चंगाई टेक्स मे पूरी करे और मुझे बल दे.

हम आपसे प्यार करते और आपकी सराहना करते हैं

सैमी और टेक्स