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devotions
उद्धार का निश्चय

विजयी मसीही जीवन जीने के मार्ग में एक सबसे बड़ी बाधा विश्वासी में अपने उद्धार के निश्चय की कमी होना है। यदि हम निरन्तर अपने जीवनों में परमेश्वर की क्षमा पर सन्देह करते रहते हैं तो शैतान हमें प्रभावहीन बना देता है। मैं ऐसे बहुत सारे मसीहियों से मिला हूँ जो अपने जीवनों में विजय पाना चाहते हैं परन्तु हमेशा अपने आप को संघर्ष करते हुए और पराजित पाते हैं। यदि परमेश्वर के साथ हमारा सम्बन्ध सुरक्षित नहीं है तो पराजय निश्चित है और विजय एक सपना मात्र है।

बहुत वर्ष पहले मेरा एक मित्र था जो मसीह को जान लेने के बावजूद भी परमेश्वर के द्वारा स्वीकारे जाने के विषय पर निरन्तर संघर्ष करता था। वह एक लड़ाई-झगड़े वाले परिवार में पला बढ़ा था। उसका पिता एक शराबी था और जब भी वह शराब के नशे में धुत होता था तो बच्चों को मारता-पीटता था। इसका परिणाम यह हुआ कि जब मेरा यह मित्र मसीही बना तो वह परमेश्वर को भी उसी दृष्टि से देखता था जिससे वह अपने पिता को देखता था। जब भी वह कोई गलती करता तो उसे लगता था कि परमेश्वर ने उसे अस्वीकार कर दिया है और उसे डर लगता कि अब पता नहीं उस के साथ क्या होगा। फिर एक मसीही अगुवा मेरे मित्र की सहायता करने लगा और उसने मेरे इस मित्र को न केवल परमेश्वर के वचन के सत्य सिखाए, परन्तु वह स्वयं भी इन सत्यों का जीता-जागता उदाहरण था।

जब भी मेरा मित्र कहीं असफल होता तो वह मसीही अगुवा उसके साथ दयापूर्ण व्यवहार करता। वह उसे डाँटता नहीं था परन्तु उसे प्रोत्साहित करता था। जब वह आत्मिक रीति से गिरता तो वह मसीही अगुवा उसे उठाता। अब मेरा मित्र अपने जीवन में प्रतिदिन अधिक विजय का अनुभव करने लगा। उसके बाद कई वर्षों तक मैं अपने इस मित्र से नहीं मिल पाया। कुछ समय पहले वह किसी काम से मेरे शहर आया। उसने मुझे फोन किया और मिलने के लिए पूछा। उसके जीवन में आया परिवर्तन अद्भुत था। अब वह सुरक्षित था। अब वह हर किसी की स्वीकृति पाने का प्रयत्न नहीं करता था। वह जान गया था कि परमेश्वर ने उसे स्वीकार किया है और उसे मसीह में बढ़ने और परिपक्व होने की स्वतन्त्रता दी है।

बाइबल शैतान को “भाइयों पर दोष लगाने वाला” कहती है। वह परमेश्वर के सम्बन्ध में हम पर दोष लगाता है। वह हमारे संगी विश्वासियों के सम्बन्ध में हम पर दोष लगाता है। परन्तु सबसे अधिक हानि तब होती है जब हम उसके द्वारा हमारे ऊपर लगाए दोषों पर विश्वास करते हैं। हम जो विश्वास करते हैं, वही बनते हैं। यदि हम उस पर विश्वास करते हैं जो परमेश्वर कहता है तो हम स्वयं को मसीह के अनुग्रह और ज्ञान में बढ़ते हुए देखते हैं। यदि हम शैतान के दोषों पर विश्वास करते हैं तो हम पराजित होते हैं।

मैं नई “बोलो और ले लो” वाली शिक्षा की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं “परमेश्वर की प्रतिज्ञायों पर दृढ़ रहना” वाली पुरानी शिक्षा की बात कर रहा हूँ। परमेश्वर का वचन कहता है, “यह बातें मैंने तुम्हें जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो इसलिए लिखी हैं ताकि तुम यह जान लो कि तुम्हारे पास अनन्त जीवन है” (1 युहन्ना 5:13)। बाइबल कहती है कि ऐसा नहीं है कि हमें आशा है, हम चाहते हैं या सोचते हैं कि शायद हमारे पास अनन्त जीवन है परन्तु हम इस बात को निश्चय के साथ जान सकते हैं कि यह हमें मिल गया है। हम इस बात में पूर्ण निश्चय के साथ आराम पा सकते हैं कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं और ऐसा इस वजह से नहीं हुआ कि हमने कुछ किया परन्तु यह केवल उसके अनुग्रह के कारण है।

जो पद मैंने अभी-अभी बताया उससे पिछला पद हमें बताता है कि हम निश्चय के साथ यह कैसे जान सकते हैं कि हमारे पास अनन्त जीवन है। यह कहता है, “वह जिसके पास पुत्र है, उसके पास अनन्त जीवन है” (1 युहन्ना 5:12)। हम यह कैसे जान सकते हैं कि हमारे पास अनन्त जीवन है। यदि परमेश्वर का पुत्र हमारे जीवनों में है तो हम पूर्ण रूप से इस निश्चय में आराम पा सकते हैं कि हमारे पास वह अनन्त जीवन है क्योंकि परमेश्वर का वचन ऐसा कहता है। इसलिए हमें परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर दृढ़ रहना सीखना चाहिए।

विजय, परमेश्वर के साथ एक सुरक्षित सम्बन्ध में से उत्पन्न होती है। यह परमेश्वर के वचन की अनन्त प्रतिज्ञाओं पर दृढ़ रहने से मिलती है। विजय का अर्थ है कि आपको पिता के उस अद्भुत प्रेम का व्यवहारिक ज्ञान है जो वह अपने बच्चों से रखता है। इसीलिए बाइबल कहती है कि “मसीह में, जिसने हमसे प्रेम किया, विजेता से भी बढ़कर हैं।” हम केवल विजेता नहीं हैं परन्तु “विजेता से भी बढ़कर हैं।”

जब हम इस महान सत्य को समझ जाते हैं तो हम गरूड़ के समान उड़ने लगते हैं। हमारे चरित्र में एक आत्मविश्वास व्याप्त हो जाता है। विजेता हमेशा आत्मविश्वास से भरे होते हैं न कि हद से अधिक आत्मविश्वास से। केवल आत्मविश्वास। विजेता अपनी योग्यता को जानते हैं। वह अपने दिलो-दिमाग में शाँत होते हैं। यीशु मसीह में एक विश्वासी होते हुए मसीही जीवन में विजय की हमारी सम्भावना अपार है क्योंकि यीशु ने हमारे लिए विजय को पहले ही सुरक्षित कर दिया है। हम उसकी विजय में चलते हैं न कि अपनी। विजय, स्वर्ग में एक निश्चित भविष्य, पृथ्वी पर उद्धारकर्ता के साथ एक सुरक्षित सम्बन्ध और मसीह में हमारी स्थिति के विषय में दृढ़ निश्चय में से आती है। पृथ्वी पर जीवन बिताने का सबसे सुरक्षित स्थान है मसीह में जीवन बिताना और यह जानना कि वह हममें जीवित है। यह वह धन्य निश्चय है जो हमारे पास है।