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devotions
परमेश्वरर के वचन के द्वारा परमेश्वसर से जुड़ना

1990 के दशक के आरम्भ में मैं मंगोलिया में विश्वावसियों के एक छोटे से झुण्ड को प्रार्थना के सिद्धाँतों की शिक्षा देने के लिए गया जो मैंने अपनी पुस्तक ‘प्रार्थना तथ्य’ में लिखे थे। जब से मसीहीयत आरम्भ हुई तब से लेकर मंगोलिया में सुसमाचार नहीं पहुँचा था। बहुत समय पहले मिशनरी वहाँ गए थे परन्तु उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था। पिछले 2000 वर्षों से वहाँ किसी ने भी परमेश्वरर के उद्धार के अद्वभुत सन्देश को नहीं सुना था।

यद्यपि वह देश अधिकतर बुद्ध को मानने वाला था परन्तु साम्यवादियों ने लोगों के मनों से यह बात मिटा दी थी कि कोई परमेश्वgर है। परन्तु जब देश में स्वतन्त्रता आनी आरम्भ हुई तो सुसमाचार के द्वार भी खुलने लगे। राजधानी उल्लान बतार में लोगों के एक छोटे से समूह ने यीशु पर विश्वा स किया। मुझे वहाँ जाकर उन्हें प्रार्थना के विषय पर शिक्षा देने के लिए कहा गया। मैंने कई दिनों तक उन्हें प्रार्थना के सिद्धाँतों के विषय में सिखाया। इन प्रार्थना सभाओं के दौरान परमेश्वंर ने बहुत सामर्थ्य के साथ कार्य किया। उल्लान बतार में जब अन्तिम सभा हुई तो वहाँ से मुझे एक दूसरे शहर दारहन जाने को कहा गया। उस समय इस शहर में एक भी विश्वा सी नहीं था। यहाँ तक कि लोगों ने यीशु के विषय में कभी सुना तक नहीं था।

जब वहाँ मैंने परमेश्वीर के विषय में बताया कि वह कौन है और हमारे जीवनों में वह क्या कर सकता है तो एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने मुझसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्नब पूछा। उसने कहा, “तुम्हारा परमेश्वोर दिखता कैसा है?” मुझे इस प्रश्नस से झटका सा लगा। आज तक कभी किसी ने मुझसे ऐसा प्रश्नं नहीं किया था। आप ऐसे प्रश्नय का क्या उत्तर दे सकते हैं? जितने कठिन प्रश्नोंे का आज तक मैंने सामना किया था यह उनमें से एक था।

परन्तु मैंने उस बुज़ुर्ग व्यक्ति से कहा, “यदि आप यह जानना चाहते हैं कि परमेश्व र दिखता कैसा है तो आप को यह जानने की आवश्य्कता है कि उसने हमें एक ऐसी पुस्तक दी है जो उसके स्वभाव, चरित्र और उसके गुणों का वर्णन करती है। इस पुस्तक को उन पवित्र मनुष्यों ने लिखा जिन्हें परमेश्वेर ने प्रेरणा दी। वह इतिहास के अलग-अलग समयों में पैदा हुए। उनमें से कुछ राजा थे और कुछ साधारण मछुआरे थे। परन्तु उन सब की मुलाकात उस परमेश्वषर से हुई थी जिसने इस सृष्टि को रचा। उन्होंने परमेश्वीर के कार्यों और साक्षियों के विषय में लिखा और यह भी कि परमेश्वनर ने उनके जीवनों को कैसे बदला था। उन्होंने जीवन के लिए उसके नियम और सिद्धाँत बताए।” ऐसा लगा कि मेरे उत्तर से वह बुज़ुर्ग सतुष्ट था।

यदि आप सच में परमेश्वनर को घनिष्ठता से जानना चाहते हैं तो आपको यह समझना आवश्यंक है कि उसकी एक वस्तुनिष्ठ साक्षी है जो बताती है कि वह कौन है और वह कैसे कार्य करता है। बाइबल परमेश्वएर के लोगों के लिए उसका वचन है। यदि हम वास्तव में परमेश्व र को जानना और उसके साथ प्रेम में जीना सीखना चाहते हैं तो हमें स्वयं को उसके वचन को पढ़ने, उसका अध्ययन करने और उस पर मनन करने के लिए समर्पित करना आवश्य क है। परमेश्वबर के वचन को प्रतिदिन अपने जीवनों में ग्रहण करने के पीछे एक चौमुखी उदेश्य है।

प्रेरित पौलुस ने जवान तीमुथियुस को लिखे अपने पत्र में विस्तारपूर्वक समझाया है कि वचन हमारे जीवनों में क्या कर सकता है। उसने कहा, “हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्व र की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है” (2 तीमुथियुस 3:16)। पौलुस एक सूची देता है कि परमेश्वार हमारे जीवनों में नकारात्मक और सकारात्मक बातों से कैसे निपटता है। सबसे पहले वह हमें बताता है कि वचन हमें किस प्रकार से सिखाता है, अर्थात यह हमें सिखाता है कि परमेश्वनर कौन है और हमे उसे कैसे जान सकते हैं और उसके साथ कैसे चल सकते हैं। दूसरी बात, बाइबल हमारे जीवनों में उन बातों के लिए हमें चिताती है जिनसे परमेश्वेर प्रसन्न नहीं होता। बाइबल हमारे अधिकार और उत्तरदायित्व का मुख्य स्रोत बन जाती है। परमेश्व्र हमारे जीवनों के चारों ओर सीमाएँ तय करता है और हमारे द्वारा उन सीमाओं का उल्लंघन करने पर हमें बताता है।

परन्तु परमेश्व्र हमारे द्वारा कुछ गलत करने पर केवल हमें बताता ही नहीं है। वह हमें सुधारता भी है अर्थात वह वचन में से हमें दिखाता है कि हम सुरक्षा की उन सीमाओं में, जहाँ हमें रहना है, वापस कैसे आ सकते हैं। अंत में, परमेश्वार हमें सही जीवन जीने के लिए निर्देश देता है, अर्थात वह हमें बताता है कि उसके साथ सही और उचित सम्बन्ध में कैसे जीना है। यह सोचना व्यर्थ है कि हम अपने जीवनों में यह जाने बिना निरन्तर विजय का अनुभव कर सकते हैं कि वह कौन है, वह कैसे कार्य करता है और वह हमसे क्या चाहता है। बाइबल एक विजयी मसीही जीवन जीने के लिए परमेश्वेर की निर्देश पुस्तिका है। यह उसका वह नक्शा है जो विजय के मार्ग पर हमारा मार्गदर्शन करता है।

एक विजेता के पास हमेशा एक योजना होती है, जीतने के लिए एक नीति। परमेश्व र ने हमें विजयी जीवन के लिए अपनी नीति दी है। यह नीति एक सदियों पुरानी पुस्तक बाइबल में मिलती है। यदि आप जीवन की दौड़ में जीतना चाहते हैं तो इस प्राचीन पुस्तक का अध्ययन कीजिए। यह परमेश्वनर का वचन है। यह जीवन जीने के लिए उसकी ईश्व रीय नीति है और धार्मिकता में ट्रेनिंग के लिए हमारी निर्देश पुस्तिका। परन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परमेश्वसर के स्वरूप का सम्पूर्ण विवरण देती है। इसे पढ़ें और एक ज़बरदस्त विजय को प्राप्त करें!