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devotions
मूसा स्कूल जाता है

परमेश्वर के प्रत्येक जन को शिक्षा की आवश्यकता है। परन्तु परमेश्वर का सेवक बनने के लिए जिस शिक्षा की आवश्यकता होती है वह समाज में दी जाने वाली शिक्षा से भिन्न है। संसार के सभी स्कूल लोगों को केवल जानकारी देते हैं जबकि परमेश्वर का स्कूल जीवन के अनुभव देता है। संसार के स्कूलों में जाने के लिए हम बड़े-बड़े संस्थानों तथा भव्य इमारतों में जाते हैं। परन्तु परमेश्वर के स्कूल में जाने वाले को ठोकरें खाकर तथा दीन कर देने वाले अनुभवों से सीखना पड़ता है। संसार के स्कूल में पढ़ाई पूरी करने वाले को डिग्री मिलती है। परमेश्वर के स्कूल में पढ़ाई पूरी करने वाले को चरित्र मिलता है।

मूसा परमेश्वर के स्कूल में गया। वह पहले ही मिस्र के सर्वोत्तम संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर चुका था। उसका पालन-पोषण फ़िरौन की बेटी के पुत्र के रूप में हुआ था। उसके समाज में उसके पास सर्वोत्तम अवसर उपलब्ध थे। परन्तु उनमें से एक ने भी उसे उसके जीवन के लिए परमेश्वर की योजना को पूरा करने के लिए तैयार नहीं किया। उसने स्वाभाविक ज्ञान तो बहुत एकत्रित किया था परन्तु उसके पास मसीह का ज्ञान बिल्कुल नहीं था। परन्तु मूसा को शिक्षित करने के लिए परमेश्वर के पास एक योजना थी। अपने स्कूल में उसका दाखिला करने से पहले परमेश्वर ने मूसा को असफल होने दिया।

बाइबल कहती है, “ऐसा हुआ कि जब मूसा जवान हुआ, और बाहर अपने भाई-बन्धुओं के पास जाकर उनके दुःखों पर दृष्टि करने लगा; तब उसने देखा कि एक मिस्री जन उसके एक इब्री भाई को मार रहा है। उसने इधर उधर देखा कि कोई नहीं है, तो उस मिस्री को मार डाला और बालू में छिपा दिया। फिर दूसरे दिन बाहर जाकर उसने देखा कि दो इब्री पुरुष आपस में मारपीट कर रहे हैं। उसने अपराधी से कहा, “तू अपने भाई को क्यों मारता हैं?” उसने कहा, “किसने तुझे हम पर हाकिम और न्यायी ठहराया है? जिस भाँति तू ने मिस्री को घात किया, क्या उसी भाँति तू मुझे भी घात करना चाहता है?” तब मूसा यह सोचकर डर गया, “निश्चय यह बात खुल गई है।” जब फ़िरौन ने यह बात सुनी तब मूसा को घात करने की युक्ति की। तब मूसा फ़िरौन के सामने से भागा और मिद्यान देश में जाकर रहने लगा; और वह वहाँ एक कुएँ के पास बैठ गया” (निर्गमन 2:11-15)।

इससे पहले कि मूसा परमेश्वर के राज्य में उपयोग हो पाता, परमेश्वर ने उसे असफल होने दिया। परमेश्वर ने मूसा का दाखिला अपने मिद्यानी मरुस्थल वाले स्कूल में करवा दिया। साराँश यह है कि उसने दीनता के विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पवित्र आत्मा की अधीनता में पढ़ाई आरम्भ की। स्नातक होने के बाद वह परमेश्वर का जन बनने वाला था। उसे डी.डी.जी. की डिग्री मिलने वाली थी – डॉक्टरेट आफ डिपैन्डैन्स आन गॉड (परमेश्वर पर निर्भरता की उपाधि)।

मिद्यान के दीनता के विश्वविद्यालय में मूसा को विभिन्न पाठ्यक्रम लेने थे। सर्वप्रथम, उसे यह सीखना था कि परमेश्वर का कार्य परमेश्वर के समय में ही होना चाहिए। मूसा ने एक मिस्री की हत्या कर दी। उसने अपने लोगों की पीड़ा देखी और वह उन्हें उनकी गुलामी से स्वतन्त्र करना चाहता था। परन्तु वह समय से चालीस वर्ष पूर्व चल रहा था। परमेश्वर की अपनी एक समय-सारणी है। परमेश्वर का जन वही होता है जो सही समय पर, सही स्थान में, सही संदेश के साथ उपस्थित होता है। मूसा सही स्थान पर तो था परन्तु गलत समय पर। मूसा को पवित्र आत्मा की अगुवाई में और परमेश्वर की समय-सारणी के अनुसार चलना सीखना था।

परन्तु मूसा को यह भी सीखना पड़ा कि परमेश्वर का कार्य परमेश्वर की सामर्थ में ही होना चाहिए। मूसा मिस्रियों की युद्धकला में प्रशिक्षित तथा माहिर था। परन्तु परमेश्वर का कार्य मानवीय शरीर की शक्ति में नहीं किया जा सकता। इसे पवित्र आत्मा के सामर्थ्य में ही किया जा सकता है। मूसा ने देखा कि उसके इब्री भाई-बन्धुओं पर अत्याचार किया जा रहा है। वह इसे सुधारना चाहता था। उसने भरपूर कोशिश की परन्तु उसकी सभी कोशिशों ने और कुछ नहीं किया बल्कि उसके लोगों की पीड़ाएँ और बढ़ा दीं। उसे सीखना पड़ा कि परमेश्वर का कार्य “न तो बल से किया जा सकता है और न ही शक्ति से पर परमेश्वर के आत्मा के माध्यम से।”

मूसा ने दीनता के विश्वविद्यालय में एक अन्तिम पाठ सीखना था। उसे सीखना पड़ा कि परमेश्वर का कार्य परमेश्वर के तरीके से ही किया जाना चाहिए। परमेश्वर का तरीका चरित्र है। संसार का तरीका अधिक बन्धुआई तथा मृत्यु की ओर ले जाता है। परमेश्वर का तरीका मसीह के चरित्र का निर्माण करता है। इससे पहले कि मूसा दीनता के विश्वविद्यालय में से स्नातक हो पाता, उसे मिद्यान में एक पर्वत पर परमेश्वर से मुलाकात करनी थी। उसी मुलाकात से ही मूसा ने परमेश्वर को सचमुच जानना आरम्भ करना था। मूसा को परमेश्वर का जो ज्ञान प्राप्त था, उसी के माध्यम से ही उसके चरित्र का निर्माण होना था। तभी और केवल तभी, मूसा परमेश्वर के लोगों को गुलामी से स्वतन्त्र कराने के लिए तैयार हो पाता।

क्या आप परमेश्वर का जन बनना चाहते हैं? परमेश्वर के स्कूल में दाखिला ले लें।