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devotions
मूसा परमेश्वर से मिलता है

हर महान अगुवे के जीवन में निश्चित करनेवाला समय होता है. इस निश्चित करनेवाले समय के बिना लोगों को अगुवे के पीछे चलने में मुश्किल होती है क्योंकि वो उसे नही समझ पाते हैं. उन्हें ये समझना मुश्किल होता है कि अगुवे किस कारण काम करते हैं – वो जो करते हैं वो क्यों करते है. निश्चित करनेवाला पल ऐसा समय है जो किसी अगुवे की दिशा निश्चित करता है. यही जीवन की जिज्ञासा दर्शाता है.

कई साल पहले Dan Quayle युनायटेड स्टेट्स के वाईस प्रेसिडेंट ने अपनी जीवनी लिखी. उन्होंने बताया कि कैसे मिडिया निरंतर उन्हें गलत समझते रहा. अकसर मिडिया ने यही कोशिश की, कि वाईस प्रेसिडेंट Quayle को पूरी तरह से मुर्ख दिखाएँ. फिर भी जो वाईस प्रेसिडेंट को जानते थे उन्होंने कहा कि वो इस समय के सबसे उत्तम विचार करनेवाले और बुद्धिमान अगुवे हैं. वाईस प्रेसिडेंट Quayle ने कहा कि प्रेस ने उन्हें इसलिए गलत समझा क्योंकि उन्हें कभी प्रेस के सामने निश्चित करनेवाला पल नही मिला.

अगुवे की सफलता लोगों की विचारधारा पर बढ़ सकती है या कम हो सकती है. ये हर समय के सबसे महान अगुवे मूसा के जीवन के लिए भी बिलकुल सही था. उसने इस्राएलियों को उनकी गुलामी और बंधन से आज़ाद किया. वो इतिहास के महत्वपूर्ण समय परमेश्वर का पात्र था. फिर भी, मूसा की परमेश्वर के साथ मुलाकात हुई, वही उसका निश्चित करनेवाला पल था. वो मिद्दानी रेगिस्तान में एक गरीब चरवाहा था. जब वो पहाड पर था, तब परमेश्वर ने खुद को मूसा पर प्रगट किया. एक झाडी जल तो रही थी लेकिन भस्म नही हो रही थी. परमेश्वर उस झाड़ी में था. उसने मूसा का ध्यान आकर्षित करने के बाद उसका नाम लेकर उसे पुकारा. मूसा ने परमेश्वर के साथ मुलाकात का अनुभव पाया. ये ऐसा अनुभव था जो उसकी सेवकाई और जीवन निश्चित करनेवाला था.

परमेश्वर ने अपना स्वभाव और चरित्र मूसा के सामने प्रगट किया. उसने कहा, “इधर पास मत आ, और अपने पांवों से जूतियों को उतार दे, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र भूमि है” (निर्गमन ३:५). मूसा ने परमेश्वर का पहला स्वभाव गुण जाना कि वो पवित्र परमेश्वर है. उसने ये अनुभव पाया, जब परमेश्वर आता है, पवित्रता आती है. जब हम परमेश्वर की उपस्थिति में खड़े होते हैं, तो हम पूरी पवित्रता में खड़े होते हैं. उसके बारे में कुछ भी असिद्ध और अशुद्ध नही है. जब हम परमेश्वर से मुलाक़ात करते हैं, तो हमें वही करना होगा जो मूसा ने किया था – हमारे जीवन से वो सब निकालना होगा जो हमें पवित्र भूमि पर अपने पैर और जीवन मजबूती से रखने में रकावट डालते हैं.

लेकिन परमेश्वर के एक और स्वभावगुण ने मूसा का जीवन निश्चित किया – उसकी अनंतकाल की सामर्थ. जब परमेश्वर ने खुद को मूसा पर प्रगट किया, उसने कहा “मै तेरे पिता का परमेश्वर, और इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, याकूब का परमेश्वर हूँ.” तब मूसा ने जो परमेश्वर की ओर देखने से डरता था, अपना मुंह ढांक लिया” (निर्गमन ३:६). मूसा ने अपने बचपन में इब्राहीम, इसहाक और याकूब की कहानी सुनी होगी. अब वही परमेश्वर जिसने इतने सामर्थी काम किए थे वो खुद को मूसा पर प्रगट कर रहा है. इस कारण, मूसा बहुत डर गया. वो अद्भुत, अनंतकाल के और सर्वसामर्थी परमेश्वर की उपस्थिति में खड़ा था. उस मुलाकात के बाद मूसा फिर कभी वैसा नही रहा.

लेकिन मूसा ने ये भी जाना कि ये सर्वसामर्थी, पवित्र परमेश्वर, दया का भी परमेश्वर है. परमेश्वर ने मूसा से कहा, “मै अपनी प्रजा के लोग जो मिस्र में हैं, उनके दू:ख को निश्चय देखा है. और उनकी जो चिल्लाहट परिश्रम करवानेवालों के कारण होती है उसको भी मैंने सुना है, उनकी पीड़ा पर मैंने चित्त लगाया है.” (निर्गमन ३:७). लोग अवश्य ही ये सोच रहे थे कि परमेश्वर उन्हें भूल गया है, या वो उनकी पीड़ा के बारे में चिन्ता नही करता है. लेकिन परमेश्वर ने मूसा को अगल तरह से दिखाया. उसने परमेश्वर को अपने लोगों पर दया करनेवाले और उनकी चिन्ता करनेवाले परमेश्वर के रूप में जाना. ये वही दया थी जिसके कारण मूसा को इस्राएलियों को छुड़ानेवाला होने के लिए प्रोत्साहित किया. इस मुलाकात के बाद मूसा का जीवन, सेवकाई और अगुवाई पहले जैसी नही रही. उसने परमेश्वर से मुलाकात की, और वो फिर पहले जैसा व्यक्ति नही रहा. उसके जीवन और सेवकाई में निश्चित करनेवाला पल आया था.

इसी तरह से परमेश्वर के दास या दासी के जीवन में निश्चित करनवाला पल तो परमेश्वर के साथ मुलाकता करना है. उससे मुलाकात करने के बाद, हमारा जीवन किस बारे में है ये सवाल बाकि नही रहेगा. वो पूरी तरह से निश्चित होगा. आप कौन हैं और आप जीवन की अगुवाई में कहाँ जा रहे हैं ये उसके द्वारा निश्चित किया जाएगा कि आपकी मुलाकात किस के साथ हुई हैं. ये बात नही है कि आप क्या जानते हैं लेकिन आप किसे जानते हैं यही आपका जीवन निश्चित करता है.