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devotions
परमेश्वर का वचन

वह लहू छिडका हुआ वस्त्र पहिने है,और उसका नाम परमेश्वर का वचन है. (प्रकाशितवाक्य १९:१३)

हालही में मै मसीही अगुवों के साथ एक कॉन्फरन्स मे था, जहां मैंने परमेश्वर की अगुवाई के बारे मे सिखाया. मैंने कई बार कहा कि “परमेश्वर ने मेरे दिल से बातें की” और “परमेश्वर ने खास किसी चीज़ की ओर मेरी अगुवाई की.” हमारे सेशन के अंत मे एक अगुवे ने महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा, “जब आपने कहा कि “प्रभु ने आपसे बातें की” इससे आपका क्या अर्थ है?” उन्होंने पूछा “परमेश्वर आप से कैसे बातें करता है?”

मैंने जवाब दिया, “वास्तव में, परमेश्वर बहुत से तरीकों से बातें करता है. बाइबल मे एक बार उसने गधे के द्वारा बातें की. वो जैसे चाहे वैसे किसी भी तरीके से बातें कर सकता है. लेकिन मेरा अनुभव है कि वो अकसर बाइबल से बातें करता है.”

बाइबल को दूसरा नाम “परमेश्वर का वचन” भी दिया गया है. परमेश्वर ने बहुत पहले प्राचीन सत्यों के द्वारा लोगों से बातें की है. वो कभी नही बदले. वो अनंतकाल के हैं. जब हम खुले दिल से बाइबल पढते हैं, पवित्र आत्मा इस महान पुरानी किताब के द्वारा बातें करता है. वो हमारे जीवन के लिए मार्गदर्शन, मन में सच्चाई, और दिल मे शान्ति देगा.

ये गौर करना दिलचस्प है कि केवल बाइबल को ही “परमेश्वर का वचन” नही कहा गया है. यीशु का नाम भी परमेश्वर का वचन है. मसीह के ईश्वरत्व के बारे मे बाइबल मे एक महान भाग यूहन्ना के सुसमाचार मे पाया जाता है. ये कहता है, “आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन ही परमेश्वर था. यही आदि में परमेश्वर के साथ था. सबकुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ, और जो कुछ उत्पन्न हुआ है उसमे से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न नही हुई” (यूहन्ना १:१-३).

बाइबल “परमेश्वर का लिखित वचन” है, और यीशु “परमेश्वर का जीवित वचन” है. बाइबल की हर चीज़ यीशु के व्यक्तित्व की ओर ही दर्शाती है, क्योंकि यीशु परमेश्वर का जीवित वचन , उसीने सारी चीजों की सृष्टि की है. उसके बिना कुछ भी अस्तित्व मे नही आया. उत्पती के पहले अध्याय में, सृष्टि की रचना के अध्याय में, बाइबल ९ बार कहती है, “और परमेश्वर ने कहा” जब भी परमेश्वर ने किसी चीज़ की सृष्टि की, वो यही कहने से शुरू हुई “और परमेश्वर ने कहा.” परमेश्वर ने कहा और संसार अस्तित्व मे आया. उसने तारों को अपने वचन के द्वारा आकाश में लटकाया है. उसने आपको और मुझे अपने वचनों के द्वारा बनाया. उसका नाम ही “परमेश्वर का वचन” है.

लेकिन इसका आपकी विजय के साथ क्या संबंध है? सबकुछ! जब वह बोलता है, तो वो पूरा होता है. वो सिद्ध होता है. जब लोग यरूशलेम के मंदिर की सराहना कर रहें थे, उसने कहा, “वे दिन आएगे, जिनमें यह सब जो तुम देखते हो, उनमें से यहाँ किसी पत्थर पर पत्थर भी न छूटेगा, जो ढाया न जाएगा” (लूका २१:६). चार दशक के बाद, तीतुस और उसकी रोमी सेना यरूशलेम में आकर उस मंदिर को वैसे ही नाश किया जैसे यीशु ने कहा था. सच में यीशु ही “परमेश्वर का वचन” है.

अद्भुत सच्चाई ये है कि जब यीशु अपने वचन के द्वारा हमारे दिल से बातें करता है, तो हम शाश्वती रख सकते हैं कि वो जो भी कहता है वो सच है. उसने हमें जो भी बताया है वो उसे जरूर पूरा करेगा. वो हमें अपनी विजय मे लेकर चलेगा. हम उसके वचन पर भरोसा कर सकते हैं. एक प्राचीन महान गीत सरल शब्दों मे ये कहता है, “मेरे उद्धारकर्ता, परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर मैं खड़ा हूं, मै खड़ा हूँ, खड़ा हूँ, परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर खड़ा हूँ.” जब आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर खड़े रहना सीखते हैं, तो आप विजय पाएगे. ये उसके नाम मे विजय है.

आज कुछ समय निकले ताकि परमेश्वर अपने वचन के द्वारा आपके दिल से बातें करें. उसके वचन मे निश्चितता होती हैं. उसका वचन आप के टूटे दिल को चंगाई देगा और विजय मे आपकी अगुवाई करेगा. उसका वचन सत्य है क्योंकि वो सत्य है. वो परमेश्वर का वचन है.