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devotions
अदोनाय (प्रभु)

"जिस वर्ष उज्जियाह राजा मरा, मैने प्रभु को बहुत ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा, और उसके वस्त्र के घेरे से मन्दिर भर गया". (यशायाह ६:१)

वो मेरे जीवन का सबसे महान पल था. जब मैने मसीह पर भरोसा किया कि वो मेरे पाप क्षमा कर मेरे जीवन का प्रभु और उद्धारकर्ता बन जाएं, तब मै १८ साल का था. मै वो रात कभी नही भुलूंगा. ये ऐसा था कि मानो मेरे कंधे पर से लाखों पॉन्ड का वज़न उठा दिया गया हो. मेरा दिल आनंद से भर गया और उद्धारकर्ता के साथ के मेरे नए संबंध से मै रोमांचित हो गया था.

उस शाम मैने प्रचार करनेवाले सुसमाचार प्रचारक जेम्स रॉबिसन से बात-चित की. मै क्या अनुभव कर रहा था उसके बारे में मैने उन्हें बताया. मैने उन्हें ये भी बताया कि मै महसुस कर रहा हूं कि परमेश्वर चाहता है कि मै किसी तरह की सेवकाई करूं. उन्होंने जो कहा उससे मेरे बाकि जीवन के लिए मार्गदर्शन मिला. उन्होंने कहा, "सॅमी, क्या तुम जानते हो आज रात तुम्हें उद्धार देने के लिए यीशु को क्या करना पडा? क्या तुम समझते हो कि तुम्हारे पाप माफ करने के लिए उसे कौनसी किमत चुकानी पडी?"

सच में, मैने इस बारे में कभी नही सोचा था. मैने जवाब दिया, "नही, आप क्या कह रहे हैं उसके बारे में मुझे कुछ ज्यादा पता नही है."

जेम्स ने आगे कहा,"सॅमी, यीशु परमेश्वर था, वो परमेश्वर है, और वो हमेशा परमेश्वर रहेगा. लेकिन एक दिन, उसने अपना महिमा का सिंहासन छोड दिया और इस पृथ्वी पर आया. उसने खुद मनुष्य का रुप धारण किया. उसने बिना पाप का सिद्ध जीवन जीया. लेकिन, मनुष्यों ने उसका इनकार किया, दोस्तों ने उसे भुला दिया, उसकी ठटठा की गई, मज़ाक उडाया गया, हंसी उडाई गई. उस पर झुठे दोष लगाए गएं, मारा गया, और रोम के क्रुर क्रुस पर उसे जड दिया गया. अब याद रखना, ये परमेश्वर का पुत्र, राजाओं का राजा, और प्रभुओं का प्रभु था. उसने ये सब इसलिए किया क्योंकि वो आपसे प्यार करता था."

"यदि यीशु जो सबका प्रभु है, उसने आपके लिए सबकुछ दे दिया, तो आपको उसे सबकुछ देने की इच्छा रखनी चाहिए." उन्होंने आगे कहा, "चाहे उसका अर्थ तिरस्कार किया जाना, हंसी उडाना, बंदी बनाए जाना या मारे भी जाना है तो आपको इच्छा रखनी होगी कि किसी भी किमत में आगे बढे, कुछ भी कर उसके महान प्यार के बारे में लोगों को बताए."

विश्वासी के रुप में पहली रात, मैने जाना कि प्रभु यीशु, सेवक यीशु बना, मेरे लिए उसके महान प्रेम के कारण. मैने उसके प्रभुत्व को समर्पण किया. कई साल से यही मेरी विजय का स्रोत रहा है. वो प्रभु है, और मै दास हूं. जब हम परमेश्वर के साथ इस तरह से चलते है, मसीही जीवन रोमांच से भरा होता है.

यशायाह परमेश्वर को इस तरह से जानता है. बाइबल कहती है कि यशायाह ने एक दर्शन देखा, जिसमें उसने "प्रभु" को देखा. प्रभु के लिए यहां "अदोनाय" नाम उपयोग किया गया है. इसका साधारण अर्थ होता है, "स्वामी." यशायाह कि मुलाकात परमेश्वर से अदोनाय (प्रभु) के रुप में होती है. ये परमेश्वर के बारे में उसके ज्ञान से बाहर की बात थी कि उस पर लोगों की सेवकाई करने के लिए भरोसा किया जाएगा. उसने अदोनाय को ये कहते हुए सुना था, "मै किसे भेजूं? और मेरे लिए कौन जाएगा?" (यशायाह ६:८). यशायाह की मुलाकात अदोनाय परमेश्वर के साथ होती है, इसलिए वो जल्दि प्रतिउत्तर देता है, "मै यहां हूं, मुझे भेज."

जब आप परमेश्वर को अदोनाय परमेश्वर के रुप में जानते हैं, आप भी यही कहेंगे, "मै यहां हूं, अदोनाय (प्रभु), मुझे भेज. तू जहां चाहे मै जाऊंगा. तू जो चाहे कि मै करूं तो मै वही करूंगा. तू जो चाहे मै वही कहुंगा. मेरा जीवन तुझे सौंपता हूं. तू अदोनाय है. मै दास हूं. मुझे भेज. मुझे भेज.