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devotions
एल ओलम (सनातन परमेश्वर)

"क्या तुम नही जानते? क्या तुमने नही सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है".(यशायाह ४०:२८)

पाकिस्तान और भारत में सेवकाई के बंद समय में, मैने अपनी पत्नी और एक सहकर्मी से कुछ कहा जिससे जो चकित हो गएं. मैने कहा "मै सच में थक गया हूं. ये वो समय था जब मै हिम्म्त हारकर सब बंद करना चाहता था."

मेरे दोस्त ने चौककर देखते हुए कहा, "आपका मतलब है कि आप सच में घर जा रहे हैं?"

मैने कहा, "नही. मेरा शरीर कमज़ोर है. मै थक चुका हुं. जब मै थकान महसुस करता हूं, तो कई बार मुझे सबकुछ बंद कर देना लगता है." मै लगभग ढाई हफ्तों से सटिक सेवकाई और आत्मिक युद्ध में जुडा था. इस ने शारीरिक, भावनात्मक और आत्मिक रुप में मुझे थका दिया था. अवश्य ही, मै सब बंद नही करनेवाला था, क्योंकि मै जानता था कि परमेश्वर की आत्मा और सामर्थ मेरी कमज़ोरी से ज्यादा सामर्थी है. लेकिन मेरे जीवन में ऐसा समय था जब मुझे लगता था कि मै और आगे नही जा सकता हूं. हमारा शरीर कमज़ोर हो जाता है. हमारा दिल थक जाता है. हमें जागृति की जरुरत होती है. हमें परमेश्वर की ताज़गी की जरुरत होती है.

खुशखबर ये है कि उसका नाम एल ओलम, "सनातन परमेश्वर" है. उसकी न कोई शुरुवात है और न कोई अंत है. वो शुरु के पहले से था और वो अंत के बाद भी रहेगा. वो ही संसार का सृष्टिकर्ता है. वो अनंतकाल का है. एल ओलम के बारे में सबसे अदभुत बात जो यशायाह कहता है, वो ये है, "वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है"

परमेश्वर को एल ओलम के रुप में जानने की दो अदभुत सच्चाई है. पहली है, वो कभी नही थकता. वो कभी श्रमित नही होता है. जब हम थक जाते हैं, हम दौडकर उसकी बाहों में जा सकते हैं, जो कभी थकता नही है. वो हमारे दिल में ताज़गी का कूंआ हो जाता है. मेरे सच्चे अंगिकार करने से मेरी पत्नी और सहकर्मी को चौकाने के बाद, मैने उन्हें बताया. "चिन्ता मत करो, मै सब खत्म नही करूंगा, क्योंकि मै उसे जानता हूं जो कभी नही थकता है. वो मुझे ताज़गी देगा. वो मेरे दिल, प्राण और शरीर को ताज़गी देगा." और उसने बिलकुल वैसे ही किया.

जब हम परमेश्वर को एल ओलम के रुप में जानते हैं, हमारे पास अनंतकाल का कुंआ है जिससे हम पी सकते हैं. हमें रेगिस्तान में प्यास के कारण मरने की जरुरत नही है. वो हमारी अनंतकाल की ताज़गी है. लेकिन परमेश्वर को एल ओलम के रुप में जानने की दूसरी अदभुत सच्चाई है. उसकी समझ प्राचिन समय के पहले से थी और उसका ज्ञान इतिहास के अंत के बाद भी रहेगा. अकसर हम भले काम करने में थक जाते है क्योंकि हम अपने परिश्रम के प्रतिफल के बारे में निश्चित नही होते है. लेकिन एल ओलम, सनातन परमेश्वर है.जैसे यशायाह कहता है, "उसकी बुद्धि कोई समझ नही सकता है."

इसका अर्थ है मै भरोसा कर सकता हुं कि मेरा भुतकाल और भविष्य उसके हाथ में है. वो सबकुछ जानता है और सारी चिज़ें उसके नियंत्रण में है. वो हमारी परिस्थिती को जानता है. वो हमारी जरुरतों को समझता है. उसने हमें बनाया है. भुतकाल में अनंतकाल से हम उसके मन में थे, और भविष्य में भी अनंतकाल तक वो हमें नही भुलेगा. उसके लिए कोई भी परिस्थिती मुश्किल नही है. कोई भी परिस्थिती उसे चकित नही कर सकती है. वो एल ओलम है.

यदि आप थक चुके हैं और हिम्मत हारना चाहते हैं, तो एल ओलम "सनातन परमेश्वर" की बाहों में दौडकर जाईए.आपको वो मिलेगा जो जानता है, समझता है और ताज़गी देता है. वो कभी बुढा नही होता है. कितना अदभुत परमेश्वर है. एल ओलम आपको ताज़गी देगा. उस पर भरोसा रखें.