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devotions
आपका दर्शन क्या है?

हम नएं साल के ऐसे समय में प्रवेश कर चुके हैं, जिसका अनुभव करने के लिए मानवी इतिहास में केवल कुछ ही लोगों को मौका मिला है. दस साल पहले हमने दूसरे एक हज़ार साल की समय सीमा पार की है (इसवी सन २०००). ये पहला मौका था जिसमें कोई व्यक्ति सारा दिन बैठकर पूरे संसार के लोगों को नए हज़ार साल में आने का उत्सव मनाते देखें. लेकिन इस नए साल हम में से हर एक व्यक्ति इस महान प्रश्न का सामना कर रहा है - आपका दर्शन क्या है? आपके जीवन, आपके परिवार, आपके समाज, आपके देश और आपके संसार के लिए आपका दर्शन क्या है?

"दर्शन के बिना" बाइबल कहती है कि "लोग नाश होते हैं." केवल यही सच नही है लेकिन साथ ही चर्च, सेवकाई और संस्था दर्शन के बिना मर जाते हैं. केवल दर्शनवाले लोग होना ही महत्वपुर्ण नही है, लेकिन ऐसे लोग होना हैं जिन में प्रभु का दर्शन हो. हमारे पास बाइबल का दर्शन होना चाहिए - ये हमारे दिल में परमेश्वर द्वारा जन्म लेना चाहिए.

यशायाह दर्शनवाला व्यक्ति था. बाइबल यशायाह अध्याय ६ में उसके दर्शन के बारे में स्पष्ट विवरण देती है. उसका दर्शन तीन तरफा था. उसका दर्शन उपर की ओर, भीतर की ओर और बाहर की ओर था. मै सोचता हूं कि यशायाह के पास जैसा दर्शन था हमें भी इस साल की शुरुवात में बिलकुल वैसे ही दर्शन की जरुरत है.

बाइबल कहती है,"जिस वर्ष उज्जियाह राजा मरा, मैने प्रभु को बहुत ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा; और उसके वस्त्र के घेरे से मंदिर भर गया था" (यशायाह ६:१). यशायाह के ऊपरी दर्शन में, उसने "प्रभु को देखा." इतिहास के इस अद्भुत पल हमें जो सबसे महान दर्शन चाहिए वो यही है. हमें परमेश्वर की ताज़ी झलक चाहिए. हमें उसे उसके स्वभावगुण और चरित्र में देखना होगा. बडी बिल्डींग और क्रमबद्ध प्रोग्राम से बढकर हमें परमेश्वर की ताज़ी झलक चाहिए. उसे जानना ही हमारी जिज्ञासा होनी चाहिए - कि उसके साथ चले और उसकी पूरी महिमा में उसे देखें.

जैसे यशायाह ने परमेश्वर को उसके सिंहासन पर देखा उसने उसे उसके अधिकार और सामर्थ में देखा. परमेश्वर का सिंहासन सारे संसार में अधिकार और सामर्थ का एकमात्र स्थान दर्शाता है. हमें ये बात अच्छे से समझनी होगी कि परमेश्वर अभी भी अपने सिंहासन पर है. उसने उसे खाली नही किया है. वो सारा अधिकार और सामर्थ उसी की है.

लेकिन यशायाह ने परमेश्वर को उसकी पवित्रता में भी देखा. वचन कहता है कि स्वर्गदूत पुकार उठे,"सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरी है" (यशायाह ६:३). पूरे युग में परमेश्वर के महान दास और दासी किसी न किसी तरह से परमेश्वर को उसकी पवित्रता में जान पाएं हैं. ये यशायाह के साथ कुछ अलग नही था, और आपके और मेरे साथ भी ये अलग नही है. जब यशायाह ने परमेश्वर को उसकी पुरी शुद्धता में देखा, तब उसने खुद को परमेश्वर की पवित्रता की ज्योति में देखा और वो टुट गया. हम उसे जितना ज्यादा देखेंगे उतना ज्यादा हम जान पाएगे कि हम कितने उसके समान नही है. ऐसा दर्शन गहरा टुटापन और सच्चा अंगिकार उत्पन्न करता है. परमेश्वर टुटे दिल और भग्न आत्मा को तुच्छ नही जानता है. वो ऐसे ही दिल खोजता है.

यशायाह के दर्शन का अंतिम भाग उसके आस-पास के संसार के लिए था. एक बार उसने प्रभु को देखा और खुद को देखा, फिर उसने जरुरतमंद और चोट खाए संसार को देखा. उसका दिल टुट गया. उसने परमेश्वर की वाणी को ये कहते सुना,"मै किसे भेजूं, और हमारे लिए कौन जाएगा?" (वचन ८) और यशायाह ने कहा,"मै यहां हुं, मुझे भेज" (वचन ८).

जब हम वो देखेंगे जो यशायाह ने देखा था, तब हम समझ पाएगे कि बाहर संसार यीशु की महान जरुरत मे पडा है. हम भी, परमेश्वर की बुलाहट की आवाज़ सुन पाएगे, कि संसार तक पहुंचे. आपका दर्शन क्या है?