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devotions
बेदारी प्रार्थना के पंखों पर उतरती है

वे कुछ ऐसे दुर्लभ क्षण थे जो मैंने पहले कभी अपने मसीही जीवन में अनुभव नहीं किए थे। इसके पूर्व कि मैं उपवास को बौद्धिक रूप से समझने से पहले उन दिनों में ही मुझे उपवास के वास्तविक अर्थ की समझ प्राप्त हुई। मेरे प्रयत्न करने पर भी मैं कुछ नहीं खा पाया। जब प्रातःकाल मैं उठा, तो मेरे हृदय में मेरे उद्धारकर्ता के साथ समय व्यतीत करने की लालसा थी। वहाँ परमेश्वर की उपस्थिति का ऐसा अनुभव था कि हम में से कई लोग प्रार्थना कक्ष में घण्टों समय व्यतीत करने के अतिरिक्त और कुछ भी नही कर सके। यह ऐसा प्रतीत हुआ मानो समय थम गया। वे पृथ्वी पर स्वर्ग के दिन थे। नौजवान मसीही के रूप में यह मेरी उस के साथ पहली भेंट थी जिसे लोग “बेदारी” कहते हैं।

मेरा और मेरी पत्नी टैक्स का विवाह हुआ ही था जब यह बेदारी आई। लूइसिआना के मोनरो प्रान्त में एक पासबान ने मुझे अपनी कलीसिया में एक युवा सुसमाचार सभा का आयोजन करने के लिए कहा। मैंने उनसे मिलने का प्रयत्न तो किया किन्तु इसमें मेरी दिल्चस्पी बहुत ही कम थी। फिर भी वह पासबान मुझे निरन्तर उत्साहित करते रहे, “मैं प्रार्थना कर रहा हूँ,” वह कहते थे, “और परमेश्वर कुछ अद्भुत करने पर है।” मैं इच्छा रखता हूँ कि उनके जैसा विश्वास मेरा भी हो।

वह युवा सुसमाचार सभा बुधवार की संध्या को उन पासबान की कलीसिया में प्रारम्भ हुई। किन्तु वहाँ मात्र कुछ युवा ही आए। यह 1970 के दशक के प्रारम्भ का समय था। जब युवा लोग कलीसिया से कम होते जा रहे थे। मनोविकारकारी दवाएँ युवाओं में लोकप्रिय होती जा रही थी। वियतनाम युद्ध अपने ज़ोरों पर था। जातीय तनाव बढ़ता जा रहा था। आत्मिक बातों में लोगों की रुचि बहुत ही कम थी।

किन्तु उस पासबान की आँखें उन परिस्थितियों पर नहीं थी। उसने तो अपनी आँखें अपने उद्धारकर्ता पर लगा रखीं थीं। उसने निरन्तर प्रार्थना की और हिम्मत नही हारी। वह लगातार यह कहता ही गया, “मैं प्रार्थना कर रहा हूँ और परमेश्वर कोई अद्भुत कार्य करने पर हैं।” किन्तु पहले बुधवार की शाम की सभा में कुछ नहीं हुआ। मैंने उस छोटे समूह को दिल से प्रचार किया। किन्तु किसी ने कोई प्रतिउत्तर दिया। मैंने अपनी पूरी सामर्थ्य से गुरुवार को भी प्रचार किया। किन्तु पुनः कुछ न हुआ। उस समय तक किसी ने कोई प्रतिउत्तर तक नहीं दिया जब मैंने लोगों से अनुरोध किया।

परन्तु जब यह सभा समाप्त होने पर ही थी एक व्यक्ति सामने आया और उसने पासबान के साथ प्रार्थना की। उसने खड़े होकर लोगों से विशेषकर युवाओं से क्षमा याचना की। उसने स्वीकार किया की वह युवाओं के सामने एक अच्छा उदाहरण नहीं रहा है। उसके बैठते ही कुछ अद्भुत हो गया। परमेश्वर की उपस्थिति उस कलीसिया में हुई। मेरे पास उस घटना का वर्णन करने के लिए प्रयाप्त शब्द तक नहीं जो इसके बाद हुआ। लोग परमेश्वर के सामने रो-रोकर अपने पापों को अंगीकार करने और क्षमा मांगने के लिए एकत्र होने लगे।

हमने सभाओं को जारी रखा। किन्तु अधिक लोगों के कारण हमें दूसरी जगह का प्रबन्ध करना पडा। हमें विश्वविद्यालय के कैंपस में जाना पडा। पहली जगह में लोग नहीं आ पाए तो हमें दूसरी जगह जाना पड़ा। किन्तु अन्त में हमें एक सार्वजनिक केन्द्र में हज़ारों लोगों के साथ ठहरना पडा। उस शहर में नशीली दवाओं का कारोबार करने वाली एक कुख्यात महिला अपराधी ने मसीह को ग्रहण किया। तीस वर्ष बाद, वह आज भी मसीह के लिए जीवन व्यतीत कर रही है। दोनों समूहों के अगुवों के मसीह को स्वीकार करने के कारण जातिवाद तनाव कम हो गया। इस बेदारी का समाचार स्थानीय समाचार पत्र के मुख्य पृष्ठ पर छपा। छः बजे के समाचारों में भी इसके विषय में बताया गया और तीस वर्ष बाद, मुझे आज भी उन लोगों से ईमेल और पत्र मिलते हैं जिन्होंने उस सभा के दौरान मसीह को स्वीकार किया।