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devotions
प्रार्थना-जागृत चर्च का तरिका

नए नियम का चर्च प्रार्थना सभा में ही जन्मा था, और वो प्रार्थना करनेवाले स्त्री और पुरुषों के द्वारा स्थिर रखा गया. जब कि आज प्रार्थना विश्वासीयों के लिए असामान्य अनुभव जान पडती है, ये पहली शताब्दी के विश्वासीयों के लिए सामान्य बात थी. प्रेरितों के काम अध्याय १ में, हम देखते है कि चर्च परमेश्वर को पुकार उठता है. अगले ही अध्याय में, पतरस और यूहन्ना प्रार्थना सभा में जा रहे थे तब परमेश्वर ने एक लंगडे आदमी को चंगाई दी. प्रेरित अध्याय चार में, चर्च परमेश्वर का चेहरा निहार रहा था. प्रेरितों के काम की पूरी किताब में, चर्च पूरी तरह से परमेश्वर पर आधारित होने पर ही स्थापित किया गया था.

चर्च ने अपने इतिहास के इन प्रारंभिक दिनों में केवल प्रार्थना ही नही की, लेकिन वो साथ में बढते भी गया. वो रफ्तार से बढता गया - इतनी रफ्ता से बढता गया कि वचन कहता है कि प्रतिदिन चर्च में हज़ारों की संख्या में लोग जुडते गएं (प्रेरित २:४६-४७). ये जानना दिलचस्प है कि प्रार्थना हमेशा चर्च मंत प्रभावशाली सामर्थ रही है. इतिहास की महान जागृति मे हमेशा प्रार्थना करनेवाले महान शान्त वीर थे. ये जागृत चर्च की एक मात्र समान बात है जिस पर कोई विवाद नही है.

संसार तक पहूंचने की नई जिज्ञासा जागृत चर्च में जन्मी है. ये तरिका सामान्य रुप में इस तरह होता है. चर्च आलस में चला जाता है. ये हमेशा नैतिक अशुध्ता और आत्मिक कमी की ओर ले जाता है. शायद चर्च सो रहा हो लेकिन पवित्र आत्मा नही. वो विश्वासयोग्य लोगों के दिल को उक्साता है और वो परमेश्वर को जागृति और नए बनाए जाने के लिए पुकारते हैं. परमेश्वर उनकी पुकार को सुनता है और भविष्यवक्ता की जिज्ञासा को उभारता है. वो नई सामर्थ और अधिकार के साथ परमेश्वर के वचन की घोषणा शुरु करते हैं. सोनेवाला चर्च अपनी निंद से जाग जाता है, पाप का अंगिकार होता है. पश्चाताप परमेश्वर के लोगों के दिलों को पकड लेता है और जिन्होंने परमेश्वर की क्षमा का अनुभव किया है उन पर खोए हुए संसार के लिए जिज्ञासा छा जाती है. इसका मुख्य असर होता है कि बहुत से लोग परमेश्वर के राज्य में जन्म लेते हैं.

ये तरिका इतिहास में शुरु हुआ और ये बार-बार दोहराया गया है. महान जागृति की शुरुवात हमेशा प्रार्थना ने ही की है. ये नम्र दिल का प्रगटिकरण है. प्रार्थना कहती है,"परमेश्वर मुझे तेरी जरुरत है, तेरे बिना मै कुछ नही कर सकता हूं." ये पूरी तरह से परमेश्वर पर आधारित रहना है.

जागृति तो परमेश्वर का अपने लोगों पर प्रकट अनुग्रह है. जो अनुग्रह हमेशा नम्र दिल में ही प्रकट किया जाता है. बाइबल कहती है,"परन्तु वो हमें और अनुग्रह देता है." इसलिए वचन कहता है,"परमेश्वर घमण्डीयों का विरोध करता है लेकिन नम्र पर अनुग्रह करता है" (याकूब ४:६). परमेश्वर घमण्डीयों से नफरत करता है, लेकिन वो नम्र लोगों के लिए कोमल और दयालू है. प्रार्थना करनेवाला चर्च हमेशा जागृत चर्च के लिए स्थान तैयार करता है.

१९७८ में, मै जर्मनी के एक छोटे चर्च का पास्टर बना - द हान्न बॅपटिस्ट चर्च. हान्न जर्मनी शब्द "हॅनचॅन" का छोटा रुप है, जिसका अर्थ मुर्गा है. दुसरे शब्दों में, मै रुस्टर, जर्मनी में मुर्गा बॅपटिस्ट चर्च का पास्टर बना. ये एक छोटा समुह था जो सामान्यत: अमरिकी मिलट्री परिवार से बना था. १९७८ में जो दु:खद घटना हुई उसके कारण मेरा दिल टूट जाता है.

मैने निर्णय लिया कि मै अपने आस-पास पुरुषों का एक समुह बनाकर उन्हें प्रार्थना करना सिखाऊंगा. लगभग १५-२० पुरुष हर हफ्ते मुझ से मिलने लगे. जैसे उन्होंने परमेश्वर के साथ निरंतर एकान्त में समय बिताना शुरु किया परमेश्वर ने उनके दिल में काम करना शुरु किया. हमारे सुसमाचार के लिए प्रार्थना प्राथमिक कार्यनीती बन गई. जैसे परमेश्वर इन पुरुषों के और उनके परिवार के दिल में गहराई से काम करने लगा, हम ने हमारे चर्च में विस्फोटक उन्नति देखी. कुछ ही महिनों में हमें चर्च के प्यू हटाकर कुर्सीयां रखनी पडी ताकि सभा में आनेवाले हर व्यक्ति को बैठने की जगह मिल सकें. उसके कुछ ही समय बाद ही हमें बहुतसी सभाएं करनी पडी. उसके कुछ ही समय बाद हमें रविवार की शाम लोकल हाय स्कुल में सभा भी शुरु करनी पडी. हम ने प्रार्थना की और प्रभु ने काम किया. प्रभु के वचन के लिए जो लोग भुखे थे उन्हें हम संभाल भी नही पाए.

क्या हुआ? स्त्री और पुरुषों ने प्रार्थना शुरु की थी और प्रभु की आत्मा काम करने लगी. प्रारंभिक चर्च में यही उंडेला गया था. परमेश्वर नही बदला. शायद उसके तरिके मुश्किल हो, लेकिन उसके सिद्धान्त वैसे ही रहते हैं. प्रार्थना करनेवाला चर्च जागृत चर्च उत्पन्न करेगा.