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devotions
प्रार्थना, जागृत और इतिहास

प्रार्थना ने केवल बाइबल के समय ही जागृति नही लाई, लेकिन ये चर्च के इतिहास में हर महान जागृति के लिए मुख्य कारण रहा है. १७०० में प्रभु का हाथ जॉन वेसली और जॉर्ज वाईटफिल्ड पर महान रुप में था. परमेश्वर ने उनका उपयोग किया कि उनके द्वारा प्रभुराज्य में बहुत से लोगों को ले आएं.

अरनॉल्ड डालीमोर ने मिस्टर वाईटफिल्ड की बायोग्राफी लिखते समय लिखा किया क्या हुआ था. मिस्टर वाईटफिल्ड ने कहा,"सुबह भोर के समय, दोपहर में, शाम और आधी रात, साथ ही सारा दिन, धन्य यीशु मेरे दिल से मुलाकात करता रहा. स्टोन हाऊस के पास के पेड शायद कह उठते, वो बता सकते हैं कि मैने और कुछ लोगों ने वहां धन्य प्रभु के साथ कैसे समय का आनंद उठाया है,, मै प्रभु की अगणित सामर्थ के द्वारा इतना प्रभावित हुआ कि खुद को भूमि पर गिराना चाहता था और मेरी आत्मा को उसके हाथ में खाली रखना चाहता था ताकि वो जो चाहे वो उस पर लिखें."

और ऐसी प्रार्थना करने का परिणाम क्या था? वाईटफिल्ड बताते हैं कि कैसे प्रभु ने लोगों के दिलों को पकड लिया. "मैने हफ्ते में लगभग ५ बार प्रचार किया," उन्होंने कहा, "लेकिन सभा बढती चली गई, हर संभव तरह से बढती और बढती ही चली गई. ये देखना अदभुत था कि लोग कैसे ऑरगन लॉफ्ट की रेल पर लटककर आते थे, यहां तक कि चर्च की छत पर चढ गएं, और लोगों की श्वास से चर्च इतना गर्म हो गया कि भांप मानो खंबों पर बारिश की बूंदों जैसे गलती थी. कई बार जितने लोग जरुरत के साथ कमरे से बाहर जाते थे वो भीतर ही आते थे."

१७०० की सदी की महान जागृति का भेद रहा है कि परमेश्वर को प्रार्थना करनेवाले स्त्री और पुरुष मिले. लेकिन परमेश्वर नही बदला है. तब उसने क्या किया, आज वो उससे भी बढकर करने की इच्छा रखता है. केवल यही प्रश्न रहता है कि क्या आप बदलने के लिए तैयार हैं. हम ऐसे समय में रहते हैं जहां हम सोचते हैं कि हम परमेश्वर की सामर्थ के बजाए केवल अपनी मानवी योग्यता और रचनात्मकता के कारण हम संसार तक पहचूंगे. फिर भी मैने पाया है कि पूरे संसार में तेज़ी से बढनेवाले चर्च तो प्रार्थना करनेवाले चर्च हैं.

बहुत साल पहले मै मिस्र के कैरो मे एक बडे प्रेसबीटेरियन चर्च में था. उस चर्च ने अदभुत बढोतरी का अनुभव किया था. सप्ताह में लगभग ७००० लोग सभा में आते थे. अलग अलग दिनों में बहुतसी सभाएं होती थी. मैने पास्टर से पुछा की इस तरह से चर्च की अदभुत उन्नति क्यों हुई है. उन्होंने पहली बात जो मुझे बताई वो ये थी कि उस चर्च के पहले पास्टर प्रार्थना के महान व्यक्ति थे.

ये केवल मिस्र में नही लेकिन भारत में भी सत्य था. भारत का सबसे बडा हैदराबाद बॅपटिस्ट चर्च २०,००० की सदस्यता पर पहूंच गया है. ये मुस्लिम शहर में स्थित है, लेकिन जिस पास्टर ने ये चर्च बनाया उन्होंने इसे प्रार्थना की बुनियाद पर बनाया है. जैसे ही आप चर्च में प्रवेश करेगे वहां एक प्रेयर टावर है. प्रेयर टावर में प्रभु के लोगों को दिन रात प्रेयर टावर में प्रार्थना करते हुए पाया जाता है.

परमेश्वर अभी भी अपने सिंहासन पर है. वो बदला नही है. जब उसके लोग प्रार्थना कर उसे खोजते हैं, वो अपने लोगों को जागृत करता है. ये एतिहासिक रुप में सच है और ये आज भी सच है. बाइबल कहती है,"यदि मेरे लोग जो मेरे नाम से बुलाए गएं हैं, वो खुद को नम्र कर प्रार्थना करे और मेरे चेहरे को निहारे, और अपने दुष्ट मार्गों से फिर जाएं, तो मै स्वर्ग से सुनूंगा और उनके पाप क्षमा कर उन के देश को ज्यों का त्यों कर दुंगा" (२ इतिहास ७:१४). परमेश्वर नही बदला है. उसने जैसे इतिहास में लोगों को जागृत किया है वो वैसे ही आज भी लोगों को जागृत करेगा. लेकिन केवल एक शर्त है - हमें प्रार्थना करनी होगी.