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devotions
प्रार्थना, जागृत और सुसमाचार प्रचार का संबंध

उस देश में ये मेरा पहला समय था. मैने रोमानिया में परमेश्वर के सामर्थी चलन के बारे में सुना था, लेकिन जहां परमेश्वर की उपस्थिती अपने लोगों के बीच प्रकट हुई थी उस जगह चलने पर मै रोमांचित हुआ. मैने बिते युग में आएं महान जागृति के बारे में सुना था और मैने कल्पना की वो बिलकुल वैसे होगा जैसे मैनें ओराडिया, रोमानिया में देखा था. चर्च सभा शुरु होने के बहुत पहले ही लोग प्रार्थना करने और प्रभु के चेहरे को निहारने के लिए इकट्ठे हुए थे. उस रात आराधना सभा शुरु होने के पहले ही चर्च लोगों से भर गया था, लोग आईल्स में तीन या चार कतार में खडे थे. वो पूरे प्लॅटफॉर्म के आस-पास और बाहर सडक तक खडे थे.

वो साल १९८० का था और रोमानिया के विश्वासीयों को बहुत सताया जा रहा था. कुछ विश्वासीयों ने मसीह में अपने विश्वास के कारण अपनी नौकरी खो दी. बाकी लोगों को मारा गया, और कुछ को जेल में डाला गया. देखनेवाले बहुत से लोग विश्वास करते हैं कि यूरोप के पूरे इतिहास में रोमानिया के विश्वासीयों को सबसे ज्यादा सताया गया. लेकिन फिर भी दिख रहा था कि रोमानिया में पवित्र आत्मा का चलन रोका नही जा सकता है.

मै कभी नही भुलूंगा कि मै बडे ओराडिया के बडे इम्मानुएल बॅपटिस्ट चर्च में प्रचार कर रहा था. बहुत से लोग मसीह के पास आएं और शाम की सभा खत्म होते समय एक अगुवा मेरे पास आकर कहने लगा, "भाई सैमी, क्या प्रभु ने आज काम किया?" मै उनके प्रश्न के कारण चकित हो गया और मैने जवाब दिया,"क्या आपने नही देखा कि चर्च खचाखच भरा था और भुखे दिलवाले लोगों से घिरा था? क्या आपने नही देखा कि कितने लोगों ने सुसमाचार को प्रतिउत्तर दिया? आप मुझ से ये सवाल क्यों कर रहे हैं?"

उस भक्तिपुर्ण भाई ने केवल मुस्कुराकर कहा,"ओह, मै सभा में नही था, मै दूसरे कमरे में १०० लोगों के साथ था औ जब तक आप प्रचार कर रहे थे तब तक हम प्रार्थना कर रहे थे. और एक और कमरा है जहां १०० बहने थी, वो भी आपके प्रचार के समय प्रार्थना कर रही थी." मेरे पास कहने के लिए शब्द नही थे. तब तक कही भी, मेरे प्रचार के दौरान १०० स्त्री और १०० पुरुषों ने मेरे लिए प्रार्थना नही की थी. इसमें कोई आश्चर्य नही कि इतने लोग मसीह के पास आएं.

रोमानिया के उस क्षेत्र में जागृति कई साल पहले शुरु हुई जब वहां एक पास्टर ने चर्च को पश्चाताप करने और प्रभु के चेहरे को निहारने के लिए बुलाया था. उन्होंने लोगों को सिखाया कि उन लोगों के नाम लिख लें जिन्हें मसीह की जरुरत है, और उन के लिए प्रार्थना करना शुरु करें. लोगों ने प्रार्थना करनी शुरु की, नास्तिकों के लिए, उन्हें सतानेवालों के लिए, दोस्त, परिवार के सदस्य और दफ्तर के सहकर्मीयों के लिए. जागृति परमेश्वर के लोगों के दिल में जन्मी और बहुत से गैरमसीही प्रभु को जानने लगे. चर्च आगे जाकर पूरे युरोप में प्रचार करनेवाला सबसे बडा चर्च बन गया. सुसमाचार प्रचार में उनकी उन्नति तो जागृति का ही उत्पादन था, और जागृति परमेश्वर के लोगों की प्रार्थना का फल था.

चर्च के पूरे इतिहास में ये आत्माओं की महान कटनी के लिए तरिका हो गया. प्रेरितों के काम की किताब के अनुसार ये यरुशलेम के चर्च की विस्फोटक उन्नति के लिए तरिका हो गया. बाइबल कहती है," उनकी प्रार्थना के बाद, जिस जगह वो प्रार्थना करने के लिए इकटठे थे वो जगह हिल गई. और वे पवित्र आत्मा से भर गएं और हियाव से परमेश्वर के वचन का प्रचार करते रहे" (प्रेरित ४:३१). वचन के अनुसार वहां चार चिज़ें हुई. पहला, उन्होंने प्रार्थना की, दूसरा, परमेश्वर ने सबकुछ हिला दिया. तीसरा, वो पवित्र आत्मा से भर गएं. अंत में, हिसाव से परमेश्वर के का वचन प्रचार करने के लिए उन्हें सामर्थ मिली.

प्रार्थना का अंतिम उत्पादन तो जागृति है. जब हम परमेश्वर के निकट आते है, हम उसकी उपस्थिती से भर जाते हैं. वो प्रेम है, और उसका सिध्द प्रेम सारा डर दर करता है. इसलिए हियाव से प्रचार करने के लिए उनके पास सामर्थ थी. वो उसकी उपस्थिती में थे जो सिद्ध प्रेम है. डर आलौकिक प्रेम की उपस्थिती मे भाग जाता है. प्रार्थना करनेवाला चर्च हमेशा प्रचर करनेवाला चर्च होगा. सुसमाचार प्रचार और जागृति एक ही चिज़ नही है, लेकिन जब हम प्रार्थना करते है तो हम जागृति की राह पर होते हैं. और जब सच में जागृति पकड लेती है तो सुसमाचार प्रचार आलौकिक परिणाम होता है.