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devotions
प्रार्थना अविश्वासी पीडी को तैयार करती है

बहुत साल पहले मै इथोपिया गया था, वहाँ मैंने सूदान के निकट एक बडे शहर में सुसमाचार प्रचार की सभा में प्रचार किया था. एक साल पहले सूदान में जो हुआ था उसी कारण मै सूदान गया था. परमेश्वर ने अदभूत रूप में काम किया था. मैंने जो देखा और अनुभव किया उस कारण मै रोमांचीत हुआ.

इथोपिया १९ साल तक कम्युनिस्ट के अधिकार में था. जब उस देश के विश्वासी लोगों को आराधना करने की आजादी मिली, टबी इवेनजलिकल विश्वसियों ने खुद को विभाजित पाया. परिणाम स्वरूप २६ साल से भी ज्यादा समय तक एडीस अबाबा में कोई भी सुसमाचार प्रचार की बडी सभा नही हो पाई. रवान्डा, जोसफ के एक पास्टर इथोपिया गएं कि उन्हें हमारी सेवकाई के बारे में बताए. वो बहुतसी प्रार्थनाओं के उत्तर पाने के द्वारा पूरी तरह से सुसज्जित थे. उन्होने रुवान्डा और बुरुन्डी जैसे देशों में प्रभु को द्वार खोलते हुए देखा है. वो जानते थे कि प्रभु के लिए कुछ भी मुश्किल नही है.

इथोपिया में सुसमाचार की सभा के लिए मेरे आने के बारे में चर्चा होने के बाद पास्टर्स और अगुवों ने मेरे लिए प्रार्थना की और सहमत हुए की ये परमेश्वर की इच्छा है की वहा सुसमाचार की सभा का आयोजन करें. इसलिए मै उस देश में गया और प्रभू की आत्मा का अदभूत चलन देखा. विश्वासी प्रभू की आत्मा का महान रूप में उंडेले जाने के लिए भूखे थे. उन्होंने प्रार्थना की. और उन्होंने परमेश्वर के सामर्थी हाथ को काम करते देखा. चार दिनों में तीन लाख से भी ज्यादा लोग सभा में आए थे और हजारों ने अपना दिल मसीह को दिया.

उन सभाओं में एसा कुछ हुआ जिस के कारण ये सबित हो गया की प्रभू इतने अदभूत रूप में क्यों काम कर रहा है. मै सॉकर फील्ड के मंच पर था, लेकिन मैने देखा कि स्टेडीयम में मेरे पीछे ऐसी जगह है जहां २०० लोग बैठे थे. ४५ मिनट के बाद ये लोग उठकर चले गए और उनकी जगह दूसरे २०० लोग आकर बैठ गएं. फिर ४५ मिनट के बाद, ये लोग भी चले गएं और इन की जगह और २०० लोग आएं. हर सभा में ऐसा लगभग चार बार हुआ था.

आराधना सभा खत्म होने पर मैंने एक पास्टर से हर ४५ मिनट में लोगों के जाने के बारे में पूछा. उन्होंने मुझ से कहा, “ये प्रार्थना करनेवाले लोग हैं. स्टडीयम के नीचे की जगह में एक समय केवल २०० लोग ही रह सकते हैं, इस जगह पर २०० लोग प्रार्थना करते हैं और हर ४५ मिनट में उनकी जगह नया ग्रुप आता है.” मैंने जो सुना उससे मै रोमांचीत हो गया. इसका मतलब है की हर बार जब मै उस स्टडीयम में प्रचार करने गया तब ८०० लोग प्रार्थना कर रहे थे. इस में कोई आश्चर्य की बात नही थी कि प्रभू इतने सामर्थी काम क्यों कर रहा था.

सुसमाचार प्रचार परमेश्वर के दिल में है. बाइबल हमें स्पष्ट बताती है कि परमेश्वर खोए हुए और नाश होनेवाले संसार से प्यार करता है. संसार परमेश्वर के दिल में है, और संसार परमेश्वर के लोगों के दिल में भी होना चाहिए. जब ऐसा होगा, हम उन लोगों के लिए रोएगे जिन्होंने प्रभू को कभी नही जाना. सूसमाचार प्रचार की सभा का भेद प्रार्थना ही है. प्रार्थना परमेश्वर के साथ नज़दीकी का संबंध है और जब हम प्रभू की निकटता में जाते हैं, तब हम उसके राज्य को संसार के लोगों के दिल और जीवन में आते हुए देखेगे.

प्रार्थना करनेवाले नम्र और पवित्र स्त्री और पुरुष ही हमेशा सुसमाचार के लिए परमेश्वर का तरीका रहा है. वो अभी भी ऐसे लोगों को खोज रहा है क्योंकि प्रार्थना ही अविश्वासी पीड़ी के दिल को तैयार करती है. यीशु ने कहा, “जब तक किसी को पिता की ओर से ये वरदान नही दिया जाता कोई मेरे पास नही आ सकता” (यूहन्ना ६६५). हम लोगों तक मसीह का सुसमाचार लेकर इसलिए नही पहुचते हैं क्योंकि हम बहुत अच्छे सेल्समेन हैं या उत्तम वक्ता हैं. हम लोगों तक इसलिए पहुंचते हैं क्योंकि पिता ने उन के दिल में बहुत गहरा काम किया है. ये इसलिए है क्योंकि पवित्र आत्मा उन्हें उद्धार की ओर लाया है. प्रार्थना पवित्र आत्मा को खोलती है ताकि वो उन आत्मिक दीवारों को गिरा दे, जो खोएहुए और नाशमान संसार के दिल में बनी हैं.

नही, परमेश्वर का तरीका बदला नही है. वो अभी भी प्रार्थना करनेवाले नम्र और पवित्र लोगों को खोज रहा है. जब उसे ऐसा व्यक्ति मिल जाता है, तो सावधान रहे. स्वर्ग के सारे स्रोत खोले जाएगे, और आत्मिक अंधे देखेने लगेगे और टूटे दिलवाले चंगाई पाएगे.