Hide Button

सैमी टिपिट सेवकाई निम्‍नलिखित भाषाओं मे आपको यह विषय प्रदान करती है:

English  |  中文  |  فارسی(Farsi)  |  हिन्दी(Hindi)

Português  |  ਪੰਜਾਬੀ(Punjabi)  |  Român

Русский  |  Español  |  தமிழ்(Tamil)  |  اردو(Urdu)

devotions
विश्वास की प्रार्थना

“श्रीमान् क्या तुम विश्वास करते हो कि तुम्हारा शहर श्राप के आधीन हैं” यह प्रश्न था जो मुझे एक पत्रकार के द्वारा पूछा गया था। उसका साईबेरिया का शहर स्टालिन के राज्य में गुलामों की मेहनत के द्वारा बनाया गया था। जिन घरों में वह सोते और खाते थे। वह गुलामों की मेहनत से बनाये गए थे। लोंगो को उन के विश्वास के कारण कैद में भेजा गया था। उन में से बहुत सारे नोरीलिस्क का साईबेरिया का शहर बनाते मर गए थे।

जब मैं उस शहर के स्टेडियम में प्रचार करने के लिए गया, वहां मुठ्ठी भर मसीही लोग थे जो कि उस शहर में रहते थे। इसलिए हम ने उरेडिया रोमानिया से बाइबल स्कूल के विधार्थियों को भेजा कि वह सुसमाचार की सभाओं के लिए तैयारी कर सके और क्रूसेड के बाद वह नये मसीही लोंगो का नामांकन कर सके।

मेरे आने से एक दिन पहिले, विधार्थी शहर के हर एक घर में गए कि वह क्रूसेड में आने के लिए लोंगो को बुलाए और हर एक को सुसमाचार का पत्र देवें। परिणाम यह हुआ हमारी सुसमाचार की सभाओं में और उस स्टेडियम में जितनी सभाए हुई इतिहास में यह उन सब से बड़ी हाजरी थी। मैंने कभी नहीं सोचा और ऐसा कुछ अनुभव नहीं किया जो मैंने वहां देखा। जब मैंने लोगो को यीशु मसीह पर विश्वास करने के लिए बुलाया और उसके पीछे चलने के लिए कहा, तो स्टेडियम के 95 प्रतिशत लोंगो ने प्रतिऊतर दिया। यह हैरान कर देने वाला था। यह सभा की समाप्ति का समय था। जब उस पत्रकार ने मुझ से यह सवाल पूछा। मैंने उसे ऊतर दिया, मैं विश्वास नहीं करता कि तुम्हारा शहर श्राप के आधीन हैं, मैं विश्वास करता हंू कि यह आशीष के आधीन हैं। मैं कायल हूँ कि बहुत सारे लोग जो उन मजदूरों के कैंप में उस शहर में काम करते हुए मर गए। वह मसीही थे, और उन्हों ने इस दिन के लिए प्रार्थना की थी। मैं विश्वास करता हंू कि उन्हों ने प्रार्थना की, वह लोग जो एक दिन इन घरों में सोएगें और इन सड़को पर चलेंगे। एक दिन वह सुसमाचार सुनेगें और ग्रहण करेगें। आज का दिन वह दिन हैं इसलिए इस शहर ने आशीष पाई है।

जो मैं नहीं जानता था वह यह था कि इन बाइबल कालेज के विधार्थियों के दादे-दादीयां और नाने-नानीयां ही साईबेरिया के कैदखानों में मर गए थे, उनकी प्रार्थनाओं के ऊतरों को, उन के पोते-पोत्रिया और दोहते-दोहतिया थे। जो मसीह के संदेश को साईबेरिया के शहर में लेकर गए थे। शायद तुम ने प्रार्थना की हैं और तुम्हें यह लगा हैं कि स्र्वग तुम्हारी प्रार्थनाओं के ऊपर बंद रहा हैं। याद रखो बाइबल कहती हैं, “विश्वास का अर्थ उन चीजों के बारे निश्चिय होना हैं जिन की हम उम्मीद रखते हैं और उन बातों पर विश्वास करना हैं जो हम नहीं देख सकते कि वह सच हैं।” शायद तुम अभी अपनी प्रार्थनाओं का ऊतर नहीं देखोगे। परन्तु विश्वास रखो कि वह अपनी मर्जी को पूरा करेगा।